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Showing posts from May, 2020
चेहरा अब पहले जैसा नहीं रहा क़ुदरत का !! रंग कुछ अलग अलग सा है इसकी फिदरत का !! नक़ाब  तो पहले से ही था यु तो  हर किसी के चेहरे पे यहाँ !! मगर अब लिबास भी यहाँ बदला बदला सा है हर किसी का !! कोई तड़प रहा है आशियाने पर अपने पहुंचने के लिए यहाँ !! तो कोई लड़ रहा है आशियाने से बाहर निकलने के लिए यहाँ !! ज़हर यह कैसा इन हवाओं घुला सा है यहाँ !! के अब तो खुली सांस लेना हो गया है एक खवाब सा यहाँ !!
वह लम्हा एक बार फिर पीछे मूड कर मेरे पास आया था शायद !! के होंठों पे मुस्कराहट थी और पलकों से सागर बह रहा था शायद !! खामोश सा में बैठा था और कुछ गुनगुनाये जा रहा था !! और आँख खुली तो लगा के मानो वह एक खवाब था शायद !!
खामोशियों की मेरे भी एक जुबान है शायद !! वक़्त-बे-वक़्त अक्सर यह  शोर  करती रहती हैं !!
निकल पड़ा वह यु बेपरवाह सा थोड़ा निराश सा तो थोड़ा नाउम्मीद सा !! ज़िम्मेदारी का बोझ उसके कन्धों को झुकाये जा रहा था !!  और अपनों का भूखा पेट उसे रुलाये जा रहा था !! कोरोना जैसी दानव ने रोजगार उसका छीन लिया था शायद !! सुना था के वह अपने कल की ज़िन्दगी के लिए अपना एक घर बना रहा था !! दीवारें अधूरी ही रह गयी थी ,शायद उमीदें भी कहाँ  उसे अब पूरी रह गयी थी !! कर के वह फैसला अपनों को लेकर निकल गया अपने गाँव की और !! पर होनी को तो मंजूर था शायद कुछ और !! छाले पाओं के उसके, सफर के उसके की  कहानी व्यान कर रहे हैं !! कोई भूखा ,कोई टूटा है हर कोई यहाँ इस सफर में !! क्या मंज़िल मिलेगी या फिर कोई भयानक हादसा होगा अब इस सफर में !! घर पर रहें !! सुरक्षित रहें !!
 इक अरसा हुआ यूँ तो ज़िन्दगी जिए हुए हमको !!  पर ज़िन्दगी हर पल सीखा रही है हमको !! कभी रास्ते की ठोक्करें यह दिखा रही है हमको !! तो कभी उठ कर चलने के लिए  यह कह रही है हमको !! मंज़िल तो आज भी वही है जो पहले थी !! पर हर मोड़ पर ज़िन्दगी एक नया चेहरा अपना दिखा रही है हमको !!
ज़िन्दगी के पेड़ के अरमानों की साख पे आज फिर से बिजली गिरी होगी शायद!! के एक एक कर के उमीदों के पते जल कर राख होकर निचे गिरते देखे मैंने !!
 पर्कृति ने अपना चेहरा बदला है शायद !! बाद एक मुद्दत के लोग घर से बाहर निकले हैं अब शायद !! नज़रिया इंसान का इस दुनिया को देखने का अब अलग होगा शायद !! नहीं तो  केहर दुनिया पर फिर से बरपेगा शायद !!
अल्फ़ाज़ मेरे एहसास तुम्हारे !! नीदें मेरी और उनमें खवाब तुम्हारे !! सरगम मेरी और उनमें नग़में तुम्हारे !! मेरी खुशियां तेरी और मेरे तेरे यह ग़म सारे !! धड़कन मेरी और उसमें धड़कन तुम्हारी !!
इस संसार में कहीं  नहीं जिसका मोल , इतनी होती है माँ अनमोल !! गोद में जिसकी जन्नत है और अमृत के समान  हैं जिसके बोल !! प्यार के जिसको कोई नहीं सकता तोल ,इतनी होती है माँ अनमोल !! शब्द भी जो आज लाऊँ  तो कहा से लाऊँ माँ के प्यार को ब्यान करने के लिए !!  अपनी  उम्र गुजार दी माँ ने अक्सर बच्चों को खुश करने के लिए !! इस संसार में कहीं  नहीं जिसका मोल , इतनी होती है माँ अनमोल !! गोद में जिसकी जन्नत है और अमृत के समान  हैं जिसके बोल !! उसकी  हर इच्छा बच्चों  की इच्छा के बाद आती है !! बच्चों की ख़ुशी के लिए अक्सर माँ हर दुःख हंस कर सेह जाती है !! बचपन को अपने  जो आज याद करता हूँ !! डांट खा कर में माँ से ,उनके पल्लू में ही जाकर छिप जाता  था !! लिपट जाता था अक्सर माँ से जब भी  में डर जाता  था !! इस संसार में कहीं  नहीं जिसका मोल , इतनी होती है माँ अनमोल !! गोद में जिसकी जन्नत है और अमृत के समान  हैं जिसके बोल !! सुख दुःख अपने...
यु तो अक्सर भूल जाने की आदत हिअ मेरी !! पर आँखों से ओझल नहीं होती कभी यह सूरत तेरी !! वह पलकें झुकाकर  मुसकुरा कर जो तूने देख था मुझको पहली बार !! जाने क्यों अक्सर याद आता है मुझको वह पल बार बार !! एहसास वह बहुत ख़ास बन गया है अब मेरे लिए !! के सांसें और धड़कन सब चलती हैं अब बस तेरे लिए !! क्यों हर पल तुझे ही देखने की गुजारिश करता रहता है यह दिल !! और जब आती है तू सामने तो सेहम जाता है यह दिल !!  तूँ ही बता दे यह हाल ऐसा क्यों  है मेरा !! क्या तेरा दिल भी हाल पूछने को करता है मेरा !! यु तो अक्सर भूल जाने की आदत हिअ मेरी !! पर आँखों से ओझल नहीं होती कभी यह सूरत तेरी !!