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Showing posts from February, 2020
मंज़र आज यह कैसा इस महफ़िल में छाया हुआ सा है !! के हर किसी की जुबान कुछ और कह रही हो और  नज़रें कुछ और !! ऐसे मंज़र में मैं  किसे पराया समझू और किसे अपना !! के हर कोई साथ अपने यहाँ कई चेहरे ले के आया हो जैसे !!

कभी खुशनुमा सी तो कभी गुमशुदा सी लगने लगती है !!

कभी खुशनुमा सी तो कभी गुमशुदा सी लगने लगती है !! ज़िन्दगी तू क्यों इस कदर अक्सर चेहरा अपना बदलती रहती है !!
बस यूं ही अक्सर ख़ामोशी से ज़िन्दगी तुझे जीते रहे हैं !! ना तूने अपना अंदाज़ बदला और न हमने कभी अंदाज़े-इ-ब्यान अपना बदला !! कभी हमने शिकवे किये तो कभी तूने हमसे गिले किये !! ना तूने कभी कुछ हमसे कहा और न ही हमने ख़ामोशी को अपनी खामोश किया !!
ख़ामोशी  से कहूँ या फिर में करूँ ब्यान लफ़्ज़ों में !! जियूँ  तुझे या फिर करूँ गुमान तुझे जीने के एहसासों में !! कभी लफ़ज़ ही नहीं मिले जब भी तेरी असलियत को ब्यान करना चाहा मैंने !! तो कभी वह एहसास ही न ज़ाहिर हुए जब तुझे ख़ामोशी से समझाना चाहा मैंने !! ज़िन्दगी तेरी  कहानी का हर एक पन्ना मेरी एहसासों की स्याही से थोड़ा रंगा भी है !! और कुछ  जज़्बातों की ख़ामोशी से कोई पन्ना भरा भी है !! जीने लफ़्ज़ों को समझा उसने उतना ही पढ़ा ज़िन्दगी की किताब को !! और किसी ने कोशिश तक भी न की उस खली पैन को समझने की जिसमें अलफ़ाज़ तो न थे पर फिर भी भरा पड़ा था कुछ अनकहे एहसासों से !!
ज़िन्दगी जब जब भी पहुंचा थोड़ा करीब में तेरे !! के तूने तब-तब रास्ता ही बदल दिया मंज़िल का !!!
याद है मुझको वोह नादान सा बचपन मेरा !! होंठों पे मुस्कुराहट और वह अनजानी सी आहट !! मुस्कराहट की वजह तब हम खुद ही ढूंढ  लिया करते थे !! क्यूंकि सबसे बिना सोचे बिना वजह लड़ लिया करते थे !! आहट कोई भी होती थी तो माँ के पल्लू में छुप लिया करते  थे !! आज मुस्कुराहटें गुम हैं पर आहटें दिल को डराने वाली हर पल हर दम हैं !! याद है मुझको वह बचपन के वोह  दिन !! खेतों में खेला करते थे और जब कोई जहाज आसमान में दिखा तो उसको देख कर आसमान में उड़ने के सपने देखा करते थे !! आज एक दिन  जब आसमान में उड़ रहा था तो निचे देखा और महसूस हुआ मुझको !! खेतों में खेलते थे अपनों के साथ और सपने आसमान के थे इस नादान से दिल में !! और आज वक़्त की चाल देखो! आसमान में उड़ रहे हैं अकेले पर उन अपनों की यादों के साथ !! याद है मुझको वोह नादान सा बचपन मेरा !! होंठों पे मुस्कुराहट और वह अनजानी सी आहट !! आज मुस्कुराहटें गुम हैं पर आहटें दिल को डराने वाली हर पल हर दम हैं !! जो मुक़दर ने मुझे वक्षा उसको मैंने संभाल ना करके दूर की उस ख़ुशी को देखा !! आज सोचता हूँ  के बच्चा ही होता तो अच्छा था...
उम्र  भर डरते रहे जिस खवाब से रातों में अक्सर!! आँख खुली तो एहसास हुआ के वह खवाब ही अच्छा था ज़िन्दगी की सच्चाई से !!
आज थोड़ा खमोश सा हूँ  फिर से ऐ ज़िन्दगी !!  के आज लगता है फिर से तूने अपना रंग बदला है !! आज थोड़ा परेशां सा हूँ में फिर से ऐ ख़ुशी !! के आज लगता है फिर ख़ुशी ने अपना ठिकाना बदला है !! कभी खामोश तो कभी परेशान शायद यही ज़िन्दगी का सिलसिला है !!
अनकहे एहसास  यु सिमट से जाते हैं अक्सर जा कर मेरे अंदर इस कदर !! मानो के एक सैलाब सा हो सिमटा हुआ  जो बह जाने की नाकाम सी कोशिश हर बार करता है !! शायद समझ न पाए कोई इस ख़ामोशी को जो इस कदर  मुझमें समायी सी है !! बस आईने को  देख कर एहसास यह कर  लेता हूँ में भी !! दिन बसर कुछ इस कदर हर बार कर लेता हूँ में भी !!!