कैसी अजीब सी कशम काश से गुजर रहे है यह ज़िन्दगी !!के कभी दोस्त तो कभी दुश्मन सी लगने लगी है यह ज़िन्दगी !! हर मोड़ पर पहेली बन कर सामने आती है यह ज़िन्दगी !!अपनों को पराया तो कभी पराये को अपना करती है यह ज़िन्दगी!! कभी ज़ख़्म तो कभी उस ज़ख़्म का मरहम बनती है यह ज़िन्दगी!! ज़िन्दगी!! ज़िन्दगी!! ज़िन्दगी!! ज़िन्दगी !! करती है अक्सर यह हमसे दिल्लगी !!!!!!
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Showing posts from December, 2019
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वह टूटा खिलौना!! यु ही इक बार का किस्सा में सुनाता हु! टूटा सा वह खिलौना किसी की मुस्कराहट था में यह आज समझाता हूँ!! जा रहा था कोई टूटी फूटी चीजें साइकिल पे लेकर इक रोज सुबह!! के तभी एक टूटा खिलौना गिरा उस पुराणी साइकिल से वहाँ !! रोक कर अपनी वह पुरानी साइकिल उसने पीछे ममुड़ कर देखा और फिर मुस्कुराया उसने !! मैंने सोचा के क्या गिरा होगा उसका ऐसा !! तभी नज़र घुमा कर देखा के टूटा खिलौना गिरा था उसका!! एक मुस्कराहट के साथ वह मुड़ कर बापिस आया और फिर बड़ी मासूमियत से उसने फिर वह टूटा खिलौना उठाया!! यु ही इक बार का किस्सा में सुनाता हु! टूटा सा वह खिलौना किसी की मुस्कराहट था में यह आज समझाता हूँ!! सोच रहा था में खड़ा होकर यह एक कोने में , फेंका होगा किसी ने यह खिलौना टूटा समझकर कही एक कोने में !! पर टूटा यह खिलौना अब भी शायद मुस्कराहट बन गया था किसी के लिए , शायद बिताया था उन आँखों ने इसकी खवाहिश में दिन रोने में!! उठा कर उसने खिलोने को देखा था ऐसी मानो जैसे शायद टूटा खिलौना ही उसके होंठों पे वह ...
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पूछता हु अक्सर यह सवाल खुद से,क्यों है तू इस कदर जुदा मुझसे !! में कुछ सोचता हु तू कुछ करता है ,क्यों तू कदर खफा है मुझसे !! दुनिया को तू कहता है के तू खुश बहुत है ज़िन्दगी से और कभी खुश रहता नहीं है मुझसे !!! नम्म हुई मेरी भी आँखें जब जब तू उदास हुआ,फिर भी न एक लफ़ज़ तक तूने कहा मुझसे !! देखा जब भी आइना मैंने बस खुद को ही देखा,क्यों तू खुद को इस कदर छुपाता है मुझसे !! कभी मुझसे से भी हाल-इ-एहसास सुना लिया कर ,तेरा वजूद हु में यु ना अजनबी सा पेश आ मुझसे!!