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Showing posts from June, 2019
यु ही नहीं मिलते यह पल सबको अपनों के साथ यु खुशियां  बिताने को !! हमसे पूछो के तन्हाई क्या है क अक्सर आइना भी छुप जाता है हमें खुद का चेहरा दिखने को!!
में तुझसे पूछता हु तो तू कुछ बताती नहीं है ज़िन्दगी , ऐसा भी क्या राज़ है जो तूने खुद में छुपाये रखा है !! खामोश तो है तू पर अक्सर बातें भी बहुत करती है मुझसे,क हम क्यों भटकते रहते हैं अकसर तुझे ढूंढने में !! उलझन यह कैसी है और क्यों यह उलझन है!ऐसा लगता है क मौत प्यासी है उम्मीद के इस दरिया में , में तुझसे कुछ पूछता हु और तू कुछ बताती नहीं है ज़िन्दगी,ऐसा भी क्या राज़ है जो तूने खुद में छुपाये रखा है !! चाह नहीं है कोई किसी उम्मीद के बचने की ,रूबरू सा एक साया ऐसा यहाँ क्यों है !! जो तड़पता भी है इस उम्मीद के दरिया में और जो बिलखता भी  जैसे यहाँ ,कैसा यह साया है !! कही यह मेरे खुद की हक़ीक़त तो नहीं !! में तुझसे कुछ पूछता हु और तू कुछ बताती नहीं है ज़िन्दगी, ऐसा भी क्या राज़ है जो तूने खुद में छुपाये रखा है !!
कोई सब के साथ होते हुए भी अकेला है तो कोई ऐसे ही बिलकुल अकेला है !! जाने क्या कहें किसी से हम भी ऐ ग़ालिब क यह क्या दाब अब अपने साथ फिर से इस ज़िन्दगी ने खेला है !! सचाई तो यह है की सबने ही इस दाब को अब तक अकेले ही झेला है !! हिम्मत बनाये रखो और  ज़िन्दगी को उलझाए रखो  क इस सीधी  साधी ज़िन्दगी में वर्ण कहा कुछ रखा है !! यह इस ज़िन्दगी ने हमें कैसी कट्पुतली  बनाये रखा है!!