इस संसार में कहीं  नहीं जिसका मोल , इतनी होती है माँ अनमोल !!
गोद में जिसकी जन्नत है और अमृत के समान  हैं जिसके बोल !!
प्यार के जिसको कोई नहीं सकता तोल ,इतनी होती है माँ अनमोल !!
शब्द भी जो आज लाऊँ  तो कहा से लाऊँ माँ के प्यार को ब्यान करने के लिए !! 
अपनी  उम्र गुजार दी माँ ने अक्सर बच्चों को खुश करने के लिए !!

इस संसार में कहीं  नहीं जिसका मोल , इतनी होती है माँ अनमोल !!
गोद में जिसकी जन्नत है और अमृत के समान  हैं जिसके बोल !!

उसकी  हर इच्छा बच्चों  की इच्छा के बाद आती है !!
बच्चों की ख़ुशी के लिए अक्सर माँ हर दुःख हंस कर सेह जाती है !!
बचपन को अपने  जो आज याद करता हूँ !!
डांट खा कर में माँ से ,उनके पल्लू में ही जाकर छिप जाता  था !!
लिपट जाता था अक्सर माँ से जब भी  में डर जाता  था !!


इस संसार में कहीं  नहीं जिसका मोल , इतनी होती है माँ अनमोल !!
गोद में जिसकी जन्नत है और अमृत के समान  हैं जिसके बोल !!

सुख दुःख अपने बच्चों का माँ अक्सर  जान लेती है !!
माँ तो माँ है ख़ामोशी की जुबान को भी पहचान लेती है !!
वोह  रात रात भर खुद जाग कर  मुझको सुलाना माँ का !!
कर्ज़दार रहेगा माँ के बलिदान का यह जीवन सारा !!
माँ के चरणों में ही पाया है अक्सर मैंने यह जहां सारा !!

इस संसार में कहीं  नहीं जिसका मोल , इतनी होती है माँ अनमोल !!
गोद में जिसकी जन्नत है और अमृत के समान  हैं जिसके बोल !!
 










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