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Showing posts from June, 2020
पुराने घर के कमरे में मैं  गया था इक बार !! कोने में पड़ी वह टूटी हुई रुकी हुई सी घडी मिली मुझको !! बिना रुके ही मानो बरसों की कहानी ब्यान कर रही थी जैसे !!
जाने कब दूर हो गए हम उस आँचल से जहाँ हर ग़म का मरहम हमको मिल जाता था !! माँ में कभी कह नहीं पाया मगर छिप जाता था तुम्हारे आँचल में जब भी मैं सेहम जाता था !! कहने को तो दूर हूँ मगर साया तेरा हर पल मेरे साथ है !! माँ तो माँ है ,अलफ़ाज़ नहीं कोई ब्यान करने के लिए के मेरे पास सिर्फ जज़्बात हैं !!
जाने क्यों आज कल इस दिल में बेक़रारी है !! के अब यह ज़िन्दगी हमारे नहीं ,अब तो यह अमानत तुम्हारी है !! इसे अपनाना या फिर ठुकराना मर्जी तुम्हारी है !! आखिर अब तुमसे ही तो यह दुनिया हमारी है !!
एक खामोश सा मैं मुझमें हूँ  शायद !! एक हलचल सी मेरे अंदर मची हुई है शायद !! मैं खुद को ही खुद से दूर कर के औरों को करीब कर रहा हूँ शायद !! हाल सबको पूछा मैंने अक्सर अपनों का !! मगर खुद का ही हाल पूछना भूल गया हूँ शायद !! एक खामोश सा मैं मुझमें हूँ  शायद !! एक हलचल सी मेरे अंदर मची हुई है शायद !! खुशियों की परवाह अपनों की मैंने हर बार की मगर !! परवाह खुद की करना मैं भूल गया हूँ शायद !! मेरी ख़ामोशी के तूफ़ान की वजह  किसी ने  जानी नहीं !! और मैं  इस तूफ़ान में कहीं दूर खुद से बह गया हूँ शायद !! एक खामोश सा मैं मुझमें हूँ  शायद !! एक हलचल सी मेरे अंदर मची हुई है शायद !!
अहल ए महफ़िल में ये कैसा सुरूर  छाया है आज !! लगता है आज फिर कोई मोह्हबत कर के आया होगा !!!
खामोश सा एक नादान परिंदा उड़ गया एक दिन घोंसले से एक नए आशियाने की तलाश मैं !! जब बंदिशें तोड़ कर वह निकला इस खुले आसमान मैं !! ढूंढ लिया उसने एक आशियाना अपने लिए अजनबी से शहर में एक दिन !! पर एक बार यु ही खामोश सा बैठा हुआ उसको !! याद आया बहुत वो पुराना आशियाना अपना !! तब मन्न में  था उसके उड़ कर दूर उस आशियाने से छू लेना उस आसमान को !!  और आज दूर जाके हक़ीक़त उसको समझ आयी खुले आसमान की ! अगले ही पल की खबर नहीं यहाँ किसी को ज़िन्दगी की !! फिर भी जाने क्यों हर कोई इसे ही सवारने में हर पल गुज़ार रहा है !!
जन्नत से भी ऊपर है एक बस्ती !! जहाँ  एक रिश्ता रहता है और उसका नाम है दोस्ती !! न ही मतलब का ज़हर जहाँ किसी के भी दिल में पाया जाता है !! बस दोस्त के लिए जहाँ हर रिश्ता निभाया जाता है !! अगर दोस्त न हो तो फिर मेरी भी कोई नहीं है हस्ती !! एक पाक सा रिश्ता है जिसका नाम है दोस्ती !! बिना सोचे बिना जाने हर हाल जिसके सामने खोल देते हैं !! जो समुन्दर ग़म का हो तो आँखों के सागर को जिसके सामने खोल देते हैं !! खुश हुआ जो कोई तो दोस्त को याद किया और ग़म में जो अगर कोई तो दोस्ती को याद किया !! अकेला मुझे कभी रहने नहीं देता यह रिश्ता !! २ जाम पीला देता है मुझको दोस्त,दे के दोस्ती का वास्ता !! यूँ तो रिश्ते हज़ारों हैं ज़माने में मगर एक दोस्ती का ही रिश्ता सच्चा दीखता है मुझको ज़िन्दगी के आईने में !! जब दोस्त साथ हैं मेरे तो कोई ग़म की परछाई मुझे छू तक नहीं पाती !! जन्नत से भी ऊपर है एक बस्ती !! जहाँ  एक रिश्ता रहता है और उसका नाम है दोस्ती !!
जो कभी मिले फुर्सत तो पढ़ लेना मुझको इत्मीनान से !! ज़िन्दगी की नाकामियों की पूरी किताब हूँ मैं !!