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खामोशियों के इस समंदर में मेरे ज़रा संभल कर उतरना तुम।।

 खामोशियों के इस समंदर में मेरे  ज़रा संभल कर उतरना तुम।।  गहराई तक तो पहुंच जाओगे मगर बापिस जो आओगे तो  अंदाज़े वयां बदल जाएगा ।।। 

आज खामोश सा बहुत है मैखाना यारो ं!!

 आज खामोश सा बहुत है मैखाना यारो ं!!  लगता है आज साकी और पैमाने में  गुफतगू काफी गहरी सी चल रही है!!! 

ना जाने के यह वक़्त आगे बढ़ गया...

 ना जाने के यह वक़्त आगे बढ़ गया बहुत या हम बहुत पीछे रह गए दुनिये दुनिया से !! वक़्त ही आगे चला गया होगा शायद बहुत हमसे!! के उमीदों को अपनी अक्सर  चाह के भी पकड़ नहीं पाते हम !! ये कहाँ आ गए हम........  खुद और आईने के बीच ही कशमकश लगी रहती है हर दम के  अब तो तुझको भी ऐ ज़िन्दगी कहा खुल के जी पाते हैं हम !! ये कहाँ आ गए हम........ 

सोचते हैं जो के हम हार मान चुके हैं ज़िन्दगी से !!!

 सोचते हैं जो के हम हार मान चुके हैं ज़िन्दगी से !!! ज़रा कहे कोई उन्हें के घूम  कर शहर एक बार सबसे पूछ लेना !! कितनो की ज़िन्दगी में मुस्कुराहटें हैं हमसे !!

फरक तो पड़ता है मुझे भी, जब कोई बात नहीं सुनता मेरी !!

 फरक तो पड़ता है मुझे भी, जब कोई बात नहीं सुनता मेरी !! बस फरक यह है के में ख़ामोशी भरी मुस्कराहट से सब कह जाता हूँ !!  फरक तो पड़ता है मुझे भी, जब कोई ख़ामोशी  को नहीं समझाता मेरी !! पर यह आदत है मेरी की मैं फिर भी बिन कुछ कहे सबको समझाए जाता हूँ !! सबने जो था मन में उनके बिना रुके अक्सर सब कह दिया मुझसे !! बस फरक यह है की मैं बातें सबकी मुस्कुरा के सुनता जाता हूँ !! फरक तो पड़ता है मुझे भी,एहसासों को अपने अक्सर दिल में दबाये जाता हूँ !! बस फरक यह है की कागज़ की कश्ती में कलम के चप्पू घुमाये जाता हूँ !!

सब पढ़ा हमने यूं तो किताबों में ज़िन्दगी एक तेरे सिबा।।।।

सब  पढ़ा हमने यूं तो किताबों में ज़िन्दगी एक तेरे सिबा।।।। काश के कोई एक किताब तेरी भी पढ़ा जाता हमको।।।।