फरक तो पड़ता है मुझे भी, जब कोई बात नहीं सुनता मेरी !! बस फरक यह है के में ख़ामोशी भरी मुस्कराहट से सब कह जाता हूँ !! फरक तो पड़ता है मुझे भी, जब कोई ख़ामोशी को नहीं समझाता मेरी !! पर यह आदत है मेरी की मैं फिर भी बिन कुछ कहे सबको समझाए जाता हूँ !! सबने जो था मन में उनके बिना रुके अक्सर सब कह दिया मुझसे !! बस फरक यह है की मैं बातें सबकी मुस्कुरा के सुनता जाता हूँ !! फरक तो पड़ता है मुझे भी,एहसासों को अपने अक्सर दिल में दबाये जाता हूँ !! बस फरक यह है की कागज़ की कश्ती में कलम के चप्पू घुमाये जाता हूँ !!