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Showing posts from September, 2020

चेहरा बदल रहा हूँ तो कभी जीने का सलीक़ा बदल रहा हूँ !!

चेहरा बदल रहा हूँ  तो  कभी  जीने का सलीक़ा बदल रहा हूँ !! तुझे जीने के लिए ऐ ज़िन्दगी। .....  में खुद का बनाया हुआ एक लतीफा बन रहा हूँ !!! कभी कदम लड़खड़ा रहे हैं तो कभी उम्मीद डगमगा रही है !!! कभी खुद को संभाल रहा हूँ तो कभी उमीदों को जगा रहा हूँ !!!! तुझे जीने के लिए ऐ ज़िन्दगी में क्या क्या कर रहा हूँ !!!!

एक एहसास मेरा अक्सर.........

 जब  जुबान पे आया तो बवाल बन गया !! जब  ख़ामोशी में झलका तो सवाल बन गया !! जब कागज़ पे लिखा तो अलफ़ाज़ बन गया !! जब  महफ़िल में सुनाया तो  ख्याल बन गया !! एक एहसास मेरा अक्सर.......  सबके हिसाब के साथ बदलता  गया !!

एक समुन्दर की तरह लगती है मुझको यह ज़िन्दगी !!

एक समुन्दर की तरह लगती  है मुझको यह ज़िन्दगी !! जो दूर से देखो तो हसीन सी लगती है !! और जो महसूस करो तो नमकीन सी लगती लगती है !! गहराई इसकी जो  महसूस करोगे तो तुम जानोगे।।। के यह कितनी रंगीन सी लगती है !!!!  

पानी की तरह बन जाओ तुम !!

 पानी की तरह बन जाओ तुम !!  जो खुद  में जिस को  समा ले !! शांत कर देता है !! चाहे वह सुलगती हुई आग हो !! या फिर....  किसी की जलन भरे एहसास !!!

आओ बसाएं एक ऐसा जहाँ अपना !!

 आओ बसाएं एक ऐसा जहाँ अपना !! जहा रहता हो हर कोई दिल से अपना !! बरसात  होती हो जहाँ खुशियों की हर पल !! पूरा होता हो जहाँ हर कोई सपना !!!!

तू आता है और तू जाता है !!

 तू आता है और तू  जाता है !! अपने साथ  बहुत कुछ ले जाता है !! तुझे पहचानने की कोशिश जो की हमने  तो यह जाना ऐ दोस्त.........!!! के तू तो शायद वक़्त कहलाता है !!!

शिकायत मुझसे हमेशा दुनिया करती रही

शिकायत मुझसे हमेशा दुनिया करती रही  के में कभी बदला नहीं !!! जो थोड़ा सा खुद को बदला मैंने  तो जाने क्यों नज़रें दुनिया की फिर बदलने लगीं !!  

थम सी गयी धरती!! सेहम सा गया हर इंसान !!

 थम सी गयी धरती!! सेहम सा गया हर इंसान !! नक़ाब तो यूं हर चेहरे पर पहले से ही था यहाँ !! मगर नक़ाब अब बन गया सबकी पहचान !! निकलना घर से बेबजह मतलब बन गया शमशान समान  !! सेहमा सा हर कोई है अब यहाँ !! किसी का रोजगार छीन गया  तो किसी की बंद हो गयी दूकान!!  थम सी गयी धरती!! सेहम सा गया हर इंसान !! पंछी आज़ाद से उड़ रहे मानो जैसे  चूम रहे हैं आसमान !! और अपने ही घर में बंद सा हो गया हर इंसान !! इंसान से इंसान बनाने लगा है अब दूरी !! ज़िन्दगी को बचाना बन गया मजबूरी !!  थम सी गयी धरती!! सेहम सा गया हर इंसान !!

एक कवि की कुछ ऐसी होती है छवी !!

 एक कवि  की कुछ ऐसी  होती है छवी !! खामोश सा बैठा लिखता रहता है अक्सर !! किसी से भी कुछ न कहता है कभी !! सैलाब अरमानो का उफान भरता रहता है !! उसकी तस्वीर अल्फ़ाज़ों में अक्सर ब्यान करता है कवि !! एक कवि  की कुछ ऐसी  होती है छवी !!

तू ही बता दे मुझको ऐ ज़िन्दगी....

 कभी खामोश सा...  कभी सपना सा। .... कभी बेगाना कोई...  कभी अपना सा....  कभी आइना खुद का...  कभी चेहरा दुनिया का...  तू ही बता दे मुझको ऐ ज़िन्दगी....  हक़ीक़त क्या है मेरी.... !!!!!