चेहरा अब पहले जैसा नहीं रहा क़ुदरत का !!
रंग कुछ अलग अलग सा है इसकी फिदरत का !!
नक़ाब  तो पहले से ही था यु तो  हर किसी के चेहरे पे यहाँ !!
मगर अब लिबास भी यहाँ बदला बदला सा है हर किसी का !!
कोई तड़प रहा है आशियाने पर अपने पहुंचने के लिए यहाँ !!
तो कोई लड़ रहा है आशियाने से बाहर निकलने के लिए यहाँ !!
ज़हर यह कैसा इन हवाओं घुला सा है यहाँ !!
के अब तो खुली सांस लेना हो गया है एक खवाब सा यहाँ !!


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