वह लम्हा एक बार फिर पीछे मूड कर मेरे पास आया था शायद !!
के होंठों पे मुस्कराहट थी और पलकों से सागर बह रहा था शायद !!
खामोश सा में बैठा था और कुछ गुनगुनाये जा रहा था !!
और आँख खुली तो लगा के मानो वह एक खवाब था शायद !!
के होंठों पे मुस्कराहट थी और पलकों से सागर बह रहा था शायद !!
खामोश सा में बैठा था और कुछ गुनगुनाये जा रहा था !!
और आँख खुली तो लगा के मानो वह एक खवाब था शायद !!
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