इक रात अकेला घर की छत पर बैठा आसमान को देख रहा था मैं।!! चाँद की रौशनी थी और बादलों में छिपे कई तारे थे !! सोच रहा था में बादल चल रहे हैं या फिर सितारे चल रहे हैं !! फिर लगा मानो दोनों एक दूसरे से बातें कर रहे हैं !! ज़िन्दगी भी ऐसी ही है शायद.. कभी -२ समझना जरुरी हो जाता है के वक़्त आगे बढ़ रहा है या फिर हम वक़्त के आगे चल रहे हैं !! पहेली यह सुलझा लो तो ज़िन्दगी आगे बढ़ जाएगी !! और अगर उलझे रहे तो वक़्त आगे निकल जाएगा !!