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Showing posts from November, 2019
शहर यह अजनबी सा लगता है !! शहर यह अजनबी सा लगता है,के  हर एक चेहरा यहा मुझको बेबस सा लगता है !! निकला था एक दिन  में  घर से अपनी पहचान बनाने को ,के वक़्त भी त्यार था शायद मुझे इस शहर की असलियत  को !! आइना जो देखु तो वह भी बदनसीब सा लगता है, यह शहर मुझको अजनबी सा लगता है !! वक़्त यहाँ गुजरता तो है हर पल मगर ज़िन्दगी शायद लड़खड़ाती हुई सी चलती है,इंसान बेबस है वक़्त के आगे और किसम्मत चिल्लाती हुई तड़पती है! दिन एक और ढल गया आज शायद पर मुस्कान होंठों से मिलने को तरसती है !! बोझ अपनों की ख्वाहिशों का यहाँ हर कोई उठाये हुए चलता है,यह शहर मुझको अजनबी सा लगता है !! एक और दिन नया शुरू हुआ ,और एक नयी उम्मीद फिर से कोई लेकर अपने घर से निकलता है , यह शहर मुझको अजनबी सा लगता है !! किसी की जेब खाली  है तो किसी का दिल यहाँ मुझको भरा भरा सा लगता है ,कोई वक़्त पे हँसता है तो कभी कोई किस्मत से खफा खफा सा लगता है !! यह शहर मुझको अजनबी सा लगता है !! हर एक गली एक मोड़ पर यहाँ दुनिया अलग अलग सी है सब की, के मैखाने में एक शाम कोई  कुछ पल ...
उम्मीद उन आँखों की तलाश रही तिह मानो कुछ जैसे हर एक चेहरे में!! वह थकी हुई  बूढी आँखें,वक़्त के तजरुबे से लदी हुई आँखें,तलाश रही थी मानो एक चेहरा अपने का उस भीड़ में !! रुसबाई से झुक गयीं वह भी फिर क बार!! आया न था आज भी मिलने उनसे जिनको देखने को थी वह बूढी आँखें बेकरार !! मायूस सा होकर झुकग गयी ,शायद बिना कुछ कहे ख़ामोशी से सब कह गयी थी  वह बूढी आँखें!! उम्मीद उन आँखों की तलाश रही तिह मानो कुछ जैसे हर एक चेहरे में!! याद करने लगी थी वह भी अब गुजरे हुए वक़्त को , के रात रात भर जागती रही थी वह कभी किसी क लिए बूढी आँखें!! कभी किसी की हर हारी हुई हिम्मत की उम्मीद थी वह बूढी आँखें , क आज हर उम्मीद से हारने लगी हैं वह बूढी आँखें !! उम्मीद उन आँखों की तलाश रही तिह मानो कुछ जैसे हर एक चेहरे में!! सिलवटें वक़्त के तजुर्बे की जकडी हुई थी मानो उन आँखों को और बोझ अकेलेपन का टपक रहा था उन बूढी आँखों से!! फिर भी मुस्कुरा कर कह रही थी कुछ , छुपा रही थी शायद उस बोझ को सबसे पर फिर भी वह बोझ न संभल रहा था अब शायद उन बूढी आँखों से!! उम्मीद उन आँखों की तलाश रही तिह मानो कुछ जैसे हर ए...
कुछ इस तरह से मैंने अपना जीवन सजा लिया!! हर एक बार एक नया चेहरा लगा लिया!! जब कभी पाया खुद को तनहा हमने तो इस तन्हाई को ही अपना साथी बना लिया 
!हज़ारो ख़याल जो शब्दों में नहीं लिखे जाते!! दिल क अरमान हमेशा ही सुनाये नहीं जाते!! हम तो अक्सर कोशिश करते हैं उनको ब्यान करने की!! पर यह कम्बखत चाह कर भी जुबान पर नहीं आते !!
गुफत गु मेरे और मेरे आईने के बीच की कुछ इस कदर हुई एक बार!! खामोश न तू यु इस कदर रहा कर  मुझसे जो कह नहीं पाटा कभी किसी से तू!! मुस्कराहट से मेरी बरसों पहले मुलाकात हुई थी ,कह देता हु उसको तेरा पता!! आएगी तो मिल लेना और होंठों पे सजा लेना, खुद के लिए मुस्कुराना कोई नहीं है खता !! आइना एक रोज मुझे!! गुफत गु मेरे और मेरे आईने के बीच की कुछ इस कदर हुई एक बार!! बस बेचैन हु थोड़ा तेरी ख़ुशी को लेकर ,मैंने यह आईने से कहा!! वह थोड़ा मुस्कुराया और  खामोश सा  हो गया!! सोचने लाग के शायद वह भी के  में एक छोटी सी बात में ही उसे सब कह गया था शायद!! गुफत गु मेरे और मेरे आईने के बीच की कुछ इस कदर हुई एक बार!! आइना थोड़ा चुप रह कर एक बात बोला मुझसे के तेरे अपनों की मुस्कराहट छुपी है तेरी इस ख़ामोशी की आहात के पीछे !! के में भी अजनबी सा बनाने लगा हु तेरे लिए तेरी इस आदत के पीछे!! गुफत गु मेरे और मेरे आईने के बीच की कुछ इस कदर हुई एक बार!! ज़िन्दगी तो पल पल गुजर ही रही है बिना रुके बिना थक्के तो तू क्यों खामोश सा चल रहा है ज़िन्दगी के पीछे!! साथ चल कदम से कदम ...
खामोश न रह तू यु इस कदर खुद से ऐ दिल इ नादान ,ब्यान कर दे जो दिल ए हालात हैं तेरे!! ख़ामोशी को तेरी में पढ़ लेता हु अक्सर,आखिर आइना हु तेरा ,सब साफ़ है दरमियान तेरे और मेरे!! दुनिया की परवाह तू कब तक इस तरह किये जाएगा क सबकी ख़ुशी के  लिए अपनी ख़ुशी को आंसुओं के दरिया में बहता चला जाएगा!! खामोश न रह तू यु इस कदर खुद से ऐ दिल इ नादान ,ब्यान कर दे जो दिल ए हालात हैं तेरे!! जानता हु में क ख़ुशी सबकी चाहता है तू ,पर खुद से खुद का फासला कब तक यु किये जाएगा! झांक एक बार खुद के अंदर एक बार,तेरे खुद से फासलों की गहराई का तुझे पता चल जाएगा!! खामोश न रह तू यु इस कदर खुद से ऐ दिल इ नादान ,ब्यान कर दे जो दिल ए हालात हैं तेरे!!
मेरे और आईने की इस लड़ाई में जो जज़्बात निकले थे मेरे ,वोह मेरी कलम ने दागा कर के मुझसे सब उस कागज़ पर बयान कर दिया!!! अब मेरे और कागज़ में कोई पर्दा नहीं रहा शायद ,कम्बखत वक़्त बे वक़्त मुझसे नज़रें मिलने लगा है अब वोह !!