अनकहे एहसास  यु सिमट से जाते हैं अक्सर जा कर मेरे अंदर इस कदर !!
मानो के एक सैलाब सा हो सिमटा हुआ  जो बह जाने की नाकाम सी कोशिश हर बार करता है !!
शायद समझ न पाए कोई इस ख़ामोशी को जो इस कदर  मुझमें समायी सी है !!
बस आईने को  देख कर एहसास यह कर  लेता हूँ में भी !!
दिन बसर कुछ इस कदर हर बार कर लेता हूँ में भी !!!

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