याद है मुझको वोह नादान सा बचपन मेरा !!
होंठों पे मुस्कुराहट और वह अनजानी सी आहट !!
मुस्कराहट की वजह तब हम खुद ही ढूंढ  लिया करते थे !!
क्यूंकि सबसे बिना सोचे बिना वजह लड़ लिया करते थे !!
आहट कोई भी होती थी तो माँ के पल्लू में छुप लिया करते  थे !!

आज मुस्कुराहटें गुम हैं पर आहटें दिल को डराने वाली हर पल हर दम हैं !!

याद है मुझको वह बचपन के वोह  दिन !!
खेतों में खेला करते थे और जब कोई जहाज आसमान में दिखा तो उसको देख कर आसमान में उड़ने के सपने देखा करते थे !!
आज एक दिन  जब आसमान में उड़ रहा था तो निचे देखा और महसूस हुआ मुझको !!
खेतों में खेलते थे अपनों के साथ और सपने आसमान के थे इस नादान से दिल में !!
और आज वक़्त की चाल देखो! आसमान में उड़ रहे हैं अकेले पर उन अपनों की यादों के साथ !!

याद है मुझको वोह नादान सा बचपन मेरा !!
होंठों पे मुस्कुराहट और वह अनजानी सी आहट !!
आज मुस्कुराहटें गुम हैं पर आहटें दिल को डराने वाली हर पल हर दम हैं !!

जो मुक़दर ने मुझे वक्षा उसको मैंने संभाल ना करके दूर की उस ख़ुशी को देखा !!
आज सोचता हूँ  के बच्चा ही होता तो अच्छा था  शायद !!
वह नादानी वह सच्चाई तो साथ होती!!
आज जो कहोगे यह कहानी अगर किसी से भी तुम !!
ऐ  दिल-ए -नादान कोई नयी कहानी तुमपे फिर से शुरू होगी !!


याद है मुझको वोह नादान सा बचपन मेरा !!
होंठों पे मुस्कुराहट और वह अनजानी सी आहट !!
आज मुस्कुराहटें गुम हैं पर आहटें दिल को डराने वाली हर पल हर दम हैं !!

 या सीखा दे मुझको यु ही बेवजह मुस्कुराते रहना  या फिर बना दे मुझको यु बेफिक्र सा होना!!



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