मेरे और आईने की इस लड़ाई में जो जज़्बात निकले थे मेरे ,वोह मेरी कलम ने दागा कर के मुझसे सब उस कागज़ पर बयान कर दिया!!!
अब मेरे और कागज़ में कोई पर्दा नहीं रहा शायद ,कम्बखत वक़्त बे वक़्त मुझसे नज़रें मिलने लगा है अब वोह !!
अब मेरे और कागज़ में कोई पर्दा नहीं रहा शायद ,कम्बखत वक़्त बे वक़्त मुझसे नज़रें मिलने लगा है अब वोह !!
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