उम्मीद उन आँखों की तलाश रही तिह मानो कुछ जैसे हर एक चेहरे में!!

वह थकी हुई  बूढी आँखें,वक़्त के तजरुबे से लदी हुई आँखें,तलाश रही थी मानो एक चेहरा अपने का उस भीड़ में !!
रुसबाई से झुक गयीं वह भी फिर क बार!! आया न था आज भी मिलने उनसे जिनको देखने को थी वह बूढी आँखें बेकरार !!
मायूस सा होकर झुकग गयी ,शायद बिना कुछ कहे ख़ामोशी से सब कह गयी थी  वह बूढी आँखें!!


उम्मीद उन आँखों की तलाश रही तिह मानो कुछ जैसे हर एक चेहरे में!!

याद करने लगी थी वह भी अब गुजरे हुए वक़्त को , के रात रात भर जागती रही थी वह कभी किसी क लिए बूढी आँखें!!
कभी किसी की हर हारी हुई हिम्मत की उम्मीद थी वह बूढी आँखें , क आज हर उम्मीद से हारने लगी हैं वह बूढी आँखें !!

उम्मीद उन आँखों की तलाश रही तिह मानो कुछ जैसे हर एक चेहरे में!!

सिलवटें वक़्त के तजुर्बे की जकडी हुई थी मानो उन आँखों को और बोझ अकेलेपन का टपक रहा था उन बूढी आँखों से!!
फिर भी मुस्कुरा कर कह रही थी कुछ , छुपा रही थी शायद उस बोझ को सबसे पर फिर भी वह बोझ न संभल रहा था अब शायद उन बूढी आँखों से!!

उम्मीद उन आँखों की तलाश रही तिह मानो कुछ जैसे हर एक चेहरे में!!

देखा मैंने एक बार उनको तो मानो मुस्कुरा उठी वह एक पल के लिए ,ठहराव मांग रही थी वह अब उन टुटी हुई उमीदों से ,पर कह न प् रही थी शायद वह खुल कर किसी से!!


उम्मीद उन आँखों की तलाश रही तिह मानो कुछ जैसे हर एक चेहरे में!!

Comments

Post a Comment

Popular posts from this blog