गुफत गु मेरे और मेरे आईने के बीच की कुछ इस कदर हुई एक बार!!
खामोश न तू यु इस कदर रहा कर मुझसे जो कह नहीं पाटा कभी किसी से तू!!
मुस्कराहट से मेरी बरसों पहले मुलाकात हुई थी ,कह देता हु उसको तेरा पता!!
आएगी तो मिल लेना और होंठों पे सजा लेना, खुद के लिए मुस्कुराना कोई नहीं है खता !!
आइना एक रोज मुझे!!
गुफत गु मेरे और मेरे आईने के बीच की कुछ इस कदर हुई एक बार!!
बस बेचैन हु थोड़ा तेरी ख़ुशी को लेकर ,मैंने यह आईने से कहा!!
वह थोड़ा मुस्कुराया और खामोश सा हो गया!!
सोचने लाग के शायद वह भी के में एक छोटी सी बात में ही उसे सब कह गया था शायद!!
गुफत गु मेरे और मेरे आईने के बीच की कुछ इस कदर हुई एक बार!!
आइना थोड़ा चुप रह कर एक बात बोला मुझसे के तेरे अपनों की मुस्कराहट छुपी है तेरी इस ख़ामोशी की आहात के पीछे !!
के में भी अजनबी सा बनाने लगा हु तेरे लिए तेरी इस आदत के पीछे!!
गुफत गु मेरे और मेरे आईने के बीच की कुछ इस कदर हुई एक बार!!
ज़िन्दगी तो पल पल गुजर ही रही है बिना रुके बिना थक्के तो तू क्यों खामोश सा चल रहा है ज़िन्दगी के पीछे!!
साथ चल कदम से कदम मिला कर सिंदगी के जीना तू भी फिर सीख जाएगा,सुन जो अभी गुजरा है वह पल शायद फिर बापिस नहीं आएगा!!
गुफत गु मेरे और मेरे आईने के बीच की कुछ इस कदर हुई एक बार!!
मैंने कहा जो ज़िन्दगी के साथ चालू तो अपनों की मुस्कराहट पीछे छूट जाती है और जो रुक रुक कर चालू सबको साथ लेकर तो ऐ ज़िन्दगी तू आगे और मेरी मुस्कराहट पीछे छूट जाती है!!
गुफत गु मेरे और मेरे आईने के बीच की कुछ इस कदर हुई एक बार!!
आइना बोला ,ऐ मेऋ हक़ीक़त तू मुझे खवाब न बना, जी ले जरा तू यु ज़िन्दगी पे ऐतराज़ न जता!!
जो कोई शिकवा है मुझको बता तू बस मुझे यूं इस कदर अपने अलफ़ाज़ न बना!!
जी ले जो अरमान हैं तेरे के तुझसे जुड़े हैं कुछ सपने भी मेरे!!
गुफत गु मेरे और मेरे आईने के बीच की कुछ इस कदर हुई एक बार!!
वह मुझे समझती रहा और में उसको समझता रहा बार बार!!!
खामोश न तू यु इस कदर रहा कर मुझसे जो कह नहीं पाटा कभी किसी से तू!!
मुस्कराहट से मेरी बरसों पहले मुलाकात हुई थी ,कह देता हु उसको तेरा पता!!
आएगी तो मिल लेना और होंठों पे सजा लेना, खुद के लिए मुस्कुराना कोई नहीं है खता !!
आइना एक रोज मुझे!!
गुफत गु मेरे और मेरे आईने के बीच की कुछ इस कदर हुई एक बार!!
बस बेचैन हु थोड़ा तेरी ख़ुशी को लेकर ,मैंने यह आईने से कहा!!
वह थोड़ा मुस्कुराया और खामोश सा हो गया!!
सोचने लाग के शायद वह भी के में एक छोटी सी बात में ही उसे सब कह गया था शायद!!
गुफत गु मेरे और मेरे आईने के बीच की कुछ इस कदर हुई एक बार!!
आइना थोड़ा चुप रह कर एक बात बोला मुझसे के तेरे अपनों की मुस्कराहट छुपी है तेरी इस ख़ामोशी की आहात के पीछे !!
के में भी अजनबी सा बनाने लगा हु तेरे लिए तेरी इस आदत के पीछे!!
गुफत गु मेरे और मेरे आईने के बीच की कुछ इस कदर हुई एक बार!!
ज़िन्दगी तो पल पल गुजर ही रही है बिना रुके बिना थक्के तो तू क्यों खामोश सा चल रहा है ज़िन्दगी के पीछे!!
साथ चल कदम से कदम मिला कर सिंदगी के जीना तू भी फिर सीख जाएगा,सुन जो अभी गुजरा है वह पल शायद फिर बापिस नहीं आएगा!!
गुफत गु मेरे और मेरे आईने के बीच की कुछ इस कदर हुई एक बार!!
मैंने कहा जो ज़िन्दगी के साथ चालू तो अपनों की मुस्कराहट पीछे छूट जाती है और जो रुक रुक कर चालू सबको साथ लेकर तो ऐ ज़िन्दगी तू आगे और मेरी मुस्कराहट पीछे छूट जाती है!!
गुफत गु मेरे और मेरे आईने के बीच की कुछ इस कदर हुई एक बार!!
आइना बोला ,ऐ मेऋ हक़ीक़त तू मुझे खवाब न बना, जी ले जरा तू यु ज़िन्दगी पे ऐतराज़ न जता!!
जो कोई शिकवा है मुझको बता तू बस मुझे यूं इस कदर अपने अलफ़ाज़ न बना!!
जी ले जो अरमान हैं तेरे के तुझसे जुड़े हैं कुछ सपने भी मेरे!!
गुफत गु मेरे और मेरे आईने के बीच की कुछ इस कदर हुई एक बार!!
वह मुझे समझती रहा और में उसको समझता रहा बार बार!!!
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