शहर यह अजनबी सा लगता है !!

शहर यह अजनबी सा लगता है,के  हर एक चेहरा यहा मुझको बेबस सा लगता है !!
निकला था एक दिन  में  घर से अपनी पहचान बनाने को ,के वक़्त भी त्यार था शायद मुझे इस शहर की असलियत  को !!

आइना जो देखु तो वह भी बदनसीब सा लगता है, यह शहर मुझको अजनबी सा लगता है !!

वक़्त यहाँ गुजरता तो है हर पल मगर ज़िन्दगी शायद लड़खड़ाती हुई सी चलती है,इंसान बेबस है वक़्त के आगे और किसम्मत चिल्लाती हुई तड़पती है! दिन एक और ढल गया आज शायद पर मुस्कान होंठों से मिलने को तरसती है !!

बोझ अपनों की ख्वाहिशों का यहाँ हर कोई उठाये हुए चलता है,यह शहर मुझको अजनबी सा लगता है !!

एक और दिन नया शुरू हुआ ,और एक नयी उम्मीद फिर से कोई लेकर अपने घर से निकलता है ,

यह शहर मुझको अजनबी सा लगता है !!

किसी की जेब खाली  है तो किसी का दिल यहाँ मुझको भरा भरा सा लगता है ,कोई वक़्त पे हँसता है तो कभी कोई किस्मत से खफा खफा सा लगता है !!

यह शहर मुझको अजनबी सा लगता है !!

हर एक गली एक मोड़ पर यहाँ दुनिया अलग अलग सी है सब की, के मैखाने में एक शाम कोई  कुछ पल के लिए ज़िन्दगी जीता है ,मुस्कुराता है,तो कोई यहाँ राह में खामोश बैठा हुआ भूख से तड़पता सिसकता है !!

यह शहर मुझको अजनबी सा लगता है !!

दिन के शोर में हर कोई यहाँ खामोश सा मुझको लगता है , यह शहर मुझको अजनबी सा लगता है !!








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