एक खामोश सा मैं मुझमें हूँ शायद !!
एक हलचल सी मेरे अंदर मची हुई है शायद !!
मैं खुद को ही खुद से दूर कर के
औरों को करीब कर रहा हूँ शायद !!
हाल सबको पूछा मैंने अक्सर अपनों का !!
मगर खुद का ही हाल पूछना भूल गया हूँ शायद !!
एक खामोश सा मैं मुझमें हूँ शायद !!
एक हलचल सी मेरे अंदर मची हुई है शायद !!
खुशियों की परवाह अपनों की मैंने हर बार की मगर !!
परवाह खुद की करना मैं भूल गया हूँ शायद !!
मेरी ख़ामोशी के तूफ़ान की वजह किसी ने जानी नहीं !!
और मैं इस तूफ़ान में कहीं दूर खुद से बह गया हूँ शायद !!
एक खामोश सा मैं मुझमें हूँ शायद !!
एक हलचल सी मेरे अंदर मची हुई है शायद !!
एक हलचल सी मेरे अंदर मची हुई है शायद !!
मैं खुद को ही खुद से दूर कर के
औरों को करीब कर रहा हूँ शायद !!
हाल सबको पूछा मैंने अक्सर अपनों का !!
मगर खुद का ही हाल पूछना भूल गया हूँ शायद !!
एक खामोश सा मैं मुझमें हूँ शायद !!
एक हलचल सी मेरे अंदर मची हुई है शायद !!
खुशियों की परवाह अपनों की मैंने हर बार की मगर !!
परवाह खुद की करना मैं भूल गया हूँ शायद !!
मेरी ख़ामोशी के तूफ़ान की वजह किसी ने जानी नहीं !!
और मैं इस तूफ़ान में कहीं दूर खुद से बह गया हूँ शायद !!
एक खामोश सा मैं मुझमें हूँ शायद !!
एक हलचल सी मेरे अंदर मची हुई है शायद !!
Comments
Post a Comment