खामोश सा एक नादान परिंदा उड़ गया एक दिन घोंसले से
एक नए आशियाने की तलाश मैं !!
जब बंदिशें तोड़ कर वह निकला इस खुले आसमान मैं !!
ढूंढ लिया उसने एक आशियाना अपने लिए अजनबी से शहर में एक दिन !!
पर एक बार यु ही खामोश सा बैठा हुआ उसको !!
याद आया बहुत वो पुराना आशियाना अपना !!
तब मन्न में था उसके उड़ कर दूर उस आशियाने से छू लेना उस आसमान को !!
और आज दूर जाके हक़ीक़त उसको समझ आयी खुले आसमान की !
एक नए आशियाने की तलाश मैं !!
जब बंदिशें तोड़ कर वह निकला इस खुले आसमान मैं !!
ढूंढ लिया उसने एक आशियाना अपने लिए अजनबी से शहर में एक दिन !!
पर एक बार यु ही खामोश सा बैठा हुआ उसको !!
याद आया बहुत वो पुराना आशियाना अपना !!
तब मन्न में था उसके उड़ कर दूर उस आशियाने से छू लेना उस आसमान को !!
और आज दूर जाके हक़ीक़त उसको समझ आयी खुले आसमान की !
अगले ही पल की खबर नहीं यहाँ किसी को ज़िन्दगी की !!
फिर भी जाने क्यों हर कोई इसे ही सवारने में हर पल गुज़ार रहा है !!
फिर भी जाने क्यों हर कोई इसे ही सवारने में हर पल गुज़ार रहा है !!
Comments
Post a Comment