जाने कब दूर हो गए हम उस आँचल से जहाँ हर ग़म का मरहम हमको मिल जाता था !!
माँ में कभी कह नहीं पाया मगर छिप जाता था तुम्हारे आँचल में जब भी मैं सेहम जाता था !!
कहने को तो दूर हूँ मगर साया तेरा हर पल मेरे साथ है !!
माँ तो माँ है ,अलफ़ाज़ नहीं कोई ब्यान करने के लिए के मेरे पास सिर्फ जज़्बात हैं !!
माँ में कभी कह नहीं पाया मगर छिप जाता था तुम्हारे आँचल में जब भी मैं सेहम जाता था !!
कहने को तो दूर हूँ मगर साया तेरा हर पल मेरे साथ है !!
माँ तो माँ है ,अलफ़ाज़ नहीं कोई ब्यान करने के लिए के मेरे पास सिर्फ जज़्बात हैं !!
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