चेहरा बदल रहा हूँ तो कभी जीने का सलीक़ा बदल रहा हूँ !!
चेहरा बदल रहा हूँ तो कभी जीने का सलीक़ा बदल रहा हूँ !!
तुझे जीने के लिए ऐ ज़िन्दगी। .....
में खुद का बनाया हुआ एक लतीफा बन रहा हूँ !!!
कभी कदम लड़खड़ा रहे हैं तो कभी उम्मीद डगमगा रही है !!!
कभी खुद को संभाल रहा हूँ तो कभी उमीदों को जगा रहा हूँ !!!!
तुझे जीने के लिए ऐ ज़िन्दगी में क्या क्या कर रहा हूँ !!!!
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