थम सी गयी धरती!! सेहम सा गया हर इंसान !!
थम सी गयी धरती!! सेहम सा गया हर इंसान !!
नक़ाब तो यूं हर चेहरे पर पहले से ही था यहाँ !!
मगर नक़ाब अब बन गया सबकी पहचान !!
निकलना घर से बेबजह मतलब बन गया शमशान समान !!
सेहमा सा हर कोई है अब यहाँ !!
किसी का रोजगार छीन गया
तो किसी की बंद हो गयी दूकान!!
थम सी गयी धरती!! सेहम सा गया हर इंसान !!
पंछी आज़ाद से उड़ रहे मानो जैसे चूम रहे हैं आसमान !!
और अपने ही घर में बंद सा हो गया हर इंसान !!
इंसान से इंसान बनाने लगा है अब दूरी !!
ज़िन्दगी को बचाना बन गया मजबूरी !!
थम सी गयी धरती!! सेहम सा गया हर इंसान !!
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