एक कवि की कुछ ऐसी होती है छवी !!

 एक कवि  की कुछ ऐसी  होती है छवी !!

खामोश सा बैठा लिखता रहता है अक्सर !!

किसी से भी कुछ न कहता है कभी !!

सैलाब अरमानो का उफान भरता रहता है !!

उसकी तस्वीर अल्फ़ाज़ों में अक्सर ब्यान करता है कवि !!

एक कवि  की कुछ ऐसी  होती है छवी !!





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