वह टूटा खिलौना!!
यु ही इक बार का किस्सा में सुनाता हु! टूटा सा वह खिलौना किसी की मुस्कराहट था में यह आज समझाता हूँ!!
जा रहा था कोई टूटी फूटी चीजें साइकिल पे लेकर इक रोज सुबह!! के तभी एक टूटा खिलौना गिरा उस पुराणी साइकिल से वहाँ !!
रोक कर अपनी वह पुरानी साइकिल उसने पीछे ममुड़ कर देखा और फिर मुस्कुराया उसने !! मैंने सोचा के क्या गिरा होगा उसका ऐसा !! तभी नज़र घुमा कर देखा के टूटा खिलौना गिरा था उसका!!
एक मुस्कराहट के साथ वह मुड़ कर बापिस आया और फिर बड़ी मासूमियत से उसने फिर वह टूटा खिलौना उठाया!!
यु ही इक बार का किस्सा में सुनाता हु! टूटा सा वह खिलौना किसी की मुस्कराहट था में यह आज समझाता हूँ!!
सोच रहा था में खड़ा होकर यह एक कोने में , फेंका होगा किसी ने यह खिलौना टूटा समझकर कही एक कोने में !!
पर टूटा यह खिलौना अब भी शायद मुस्कराहट बन गया था किसी के लिए , शायद बिताया था उन आँखों ने इसकी खवाहिश में दिन रोने में!!
उठा कर उसने खिलोने को देखा था ऐसी मानो जैसे शायद टूटा खिलौना ही उसके होंठों पे वह मुस्कराहट लाया था !!
सब देख रहा था में दूर कही खड़ा होकर !! टूटा खिलौना उम्मीद था मुस्कराहट की किसी की खुद टूटा हुआ होकर !!
यु ही इक बार का किस्सा में सुनाता हु! टूटा सा वह खिलौना किसी की मुस्कराहट था में यह आज समझाता हूँ!
फिर चला गया वह खिलौना लेकर उस रोह सुबह और में बापिस आ गया एक सबक ज़िन्दगी का अपने साथ लेकर!!
ज़िन्दगी भी ऐसी है !! चाहे कोई कितना भी बिखरा हुआ हो वह तब भी किसी की मुस्कुरहट की वजह बन सकता है !! जब में यह सब लिख सकता हु तो शायद हर कोई ज़िन्दगी की एहमियत समझ सकता है!!
वह टूटा खिलौना!!
यु ही इक बार का किस्सा में सुनाता हु! टूटा सा वह खिलौना किसी की मुस्कराहट था में यह आज समझाता हूँ!!
जा रहा था कोई टूटी फूटी चीजें साइकिल पे लेकर इक रोज सुबह!! के तभी एक टूटा खिलौना गिरा उस पुराणी साइकिल से वहाँ !!
रोक कर अपनी वह पुरानी साइकिल उसने पीछे ममुड़ कर देखा और फिर मुस्कुराया उसने !! मैंने सोचा के क्या गिरा होगा उसका ऐसा !! तभी नज़र घुमा कर देखा के टूटा खिलौना गिरा था उसका!!
एक मुस्कराहट के साथ वह मुड़ कर बापिस आया और फिर बड़ी मासूमियत से उसने फिर वह टूटा खिलौना उठाया!!
यु ही इक बार का किस्सा में सुनाता हु! टूटा सा वह खिलौना किसी की मुस्कराहट था में यह आज समझाता हूँ!!
सोच रहा था में खड़ा होकर यह एक कोने में , फेंका होगा किसी ने यह खिलौना टूटा समझकर कही एक कोने में !!
पर टूटा यह खिलौना अब भी शायद मुस्कराहट बन गया था किसी के लिए , शायद बिताया था उन आँखों ने इसकी खवाहिश में दिन रोने में!!
उठा कर उसने खिलोने को देखा था ऐसी मानो जैसे शायद टूटा खिलौना ही उसके होंठों पे वह मुस्कराहट लाया था !!
सब देख रहा था में दूर कही खड़ा होकर !! टूटा खिलौना उम्मीद था मुस्कराहट की किसी की खुद टूटा हुआ होकर !!
यु ही इक बार का किस्सा में सुनाता हु! टूटा सा वह खिलौना किसी की मुस्कराहट था में यह आज समझाता हूँ!
फिर चला गया वह खिलौना लेकर उस रोह सुबह और में बापिस आ गया एक सबक ज़िन्दगी का अपने साथ लेकर!!
ज़िन्दगी भी ऐसी है !! चाहे कोई कितना भी बिखरा हुआ हो वह तब भी किसी की मुस्कुरहट की वजह बन सकता है !! जब में यह सब लिख सकता हु तो शायद हर कोई ज़िन्दगी की एहमियत समझ सकता है!!
वह टूटा खिलौना!!
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