पूछता हु अक्सर यह सवाल खुद से,क्यों है तू इस कदर जुदा मुझसे !!
में कुछ सोचता हु तू कुछ करता है ,क्यों तू कदर खफा है मुझसे !!
दुनिया को तू कहता है के तू खुश बहुत है ज़िन्दगी से और कभी खुश रहता नहीं है मुझसे !!!
नम्म हुई मेरी भी आँखें जब जब तू उदास हुआ,फिर भी न एक लफ़ज़ तक तूने कहा मुझसे !!
देखा जब भी आइना मैंने बस खुद को ही देखा,क्यों तू खुद को इस कदर छुपाता है मुझसे !!
कभी मुझसे से भी हाल-इ-एहसास सुना लिया कर ,तेरा वजूद हु में यु ना अजनबी सा पेश आ मुझसे!!
में कुछ सोचता हु तू कुछ करता है ,क्यों तू कदर खफा है मुझसे !!
दुनिया को तू कहता है के तू खुश बहुत है ज़िन्दगी से और कभी खुश रहता नहीं है मुझसे !!!
नम्म हुई मेरी भी आँखें जब जब तू उदास हुआ,फिर भी न एक लफ़ज़ तक तूने कहा मुझसे !!
देखा जब भी आइना मैंने बस खुद को ही देखा,क्यों तू खुद को इस कदर छुपाता है मुझसे !!
कभी मुझसे से भी हाल-इ-एहसास सुना लिया कर ,तेरा वजूद हु में यु ना अजनबी सा पेश आ मुझसे!!
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