कैसी अजीब सी कशम काश से गुजर रहे है यह ज़िन्दगी !!के कभी दोस्त तो कभी दुश्मन सी लगने लगी है यह ज़िन्दगी !!
हर मोड़ पर पहेली बन कर सामने आती है यह ज़िन्दगी !!अपनों को पराया तो कभी पराये को अपना करती है यह ज़िन्दगी!!
कभी ज़ख़्म तो कभी उस ज़ख़्म का मरहम बनती है यह ज़िन्दगी!!

ज़िन्दगी!!   ज़िन्दगी!!   ज़िन्दगी!!   ज़िन्दगी !! करती है अक्सर यह हमसे दिल्लगी !!!!!!

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