कोई सब के साथ होते हुए भी अकेला है तो कोई ऐसे ही बिलकुल अकेला है !!
जाने क्या कहें किसी से हम भी ऐ ग़ालिब क यह क्या दाब अब अपने साथ फिर से इस ज़िन्दगी ने खेला है !!
सचाई तो यह है की सबने ही इस दाब को अब तक अकेले ही झेला है !!
हिम्मत बनाये रखो और  ज़िन्दगी को उलझाए रखो  क इस सीधी  साधी ज़िन्दगी में वर्ण कहा कुछ रखा है !!
यह इस ज़िन्दगी ने हमें कैसी कट्पुतली  बनाये रखा है!!

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