ना जाने के यह वक़्त आगे बढ़ गया...
ना जाने के यह वक़्त आगे बढ़ गया बहुत या हम बहुत पीछे रह गए दुनिये दुनिया से !!
वक़्त ही आगे चला गया होगा शायद बहुत हमसे!!
के उमीदों को अपनी अक्सर चाह के भी पकड़ नहीं पाते हम !!
ये कहाँ आ गए हम........
खुद और आईने के बीच ही कशमकश लगी रहती है हर दम के
अब तो तुझको भी ऐ ज़िन्दगी कहा खुल के जी पाते हैं हम !!
ये कहाँ आ गए हम........
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