ख्वाहिशों की मुठ्ठी में

 ख्वाहिशों की मुठ्ठी में  हांथों की अपनी हमने 

उमीदों के रेत को समेटे रखा है कुछ इस कदर !!

जो ढील देता हूँ मुठ्ठी को थोड़ी तो यह  फिसलने लगता है !!

जो थोड़ा कसता हूँ मुठ्ठी को तो भी यह हाथों से  निकलने  लगता है !!



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