खवाब तो रोज आते हैं आँखों में पर अधूरे अधूरे से !!

अलफ़ाज़ तो तड़फ जाते हैं बयान करने को मगर लफ़ज़ हैं अधूरे अधूरे से !!
बयान करना तो  है हमको बहुत कुछ ऐ ज़िन्दगी  मगर वह लफ़ज़ कहा से लाएं पूरे पूरे  से !!

खवाब तो रोज आते हैं आँखों में पर अधूरे अधूरे से !!

हर रात को नींद टूट जाती है अक्सर और वह एक खवाब अक्सर अधूरा ही रह जाता है !!
 अब कहाँ से लाएं हम वह नींद आँखों में जिससे खवाब भी देखिए हम  पुरे से !!


खवाब तो रोज आते हैं आँखों में पर अधूरे अधूरे से !!

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