न निकल घर से तू बेवजह , तेरे इस करम की मिलेगी सबको सजा !!
अगर थी कोई जरुरी वजह तो आने के बाद बाहर से,
धो कर अपने हांथों को बता दे के तुझे भी है सबकी परवाह !!
वोह जो अपने अपनों को घर छोड़ कर खुद बाहर निकले हैं हमको बचाने के लिए !!
दिन रात लड़ रहे हैं वह वीर "कोरोना" को हराने के लिए !!
न निकल घर से तू बेवजह , तेरे इस करम की मिलेगी सबको सजा !!
न कर नफरत तू किसी से भी के हाथ आगे बढ़ा सबको जोड़ने के लिए !!
दूर रह के सबसे भी तू पास सबके आ सकता है !!
फैलाना है तो प्यार फैला तभी यह नफरत का वायरस मर सकता है !!
सुना है किसी ने फेंका था पथ्थर उस पर बिना किसी वजह के !!
सुना है किसी ने काट दिया उसका हाथ बिना किसी वजह से !!
जो अगर लड़ नहीं सकता तू कदम से कदम मिलकर उनसे !!
तो न रोक कदम तू उनके,उनकी राहों में पथ्थर बन के !!
न निकल घर से तू बेवजह , तेरे इस करम की मिलेगी सबको सजा !!
जो कभी करता था दुआ तू हर पल वही दुआ शायद तेरी आज कबूल हुई है !!
सड़कें खली हैं तू घर पे है और तेरी दौड़ने की रफ़्तार अब थमी हुई है !!
वह भी वीर थे जिन्होंने घर से बाहर निकल कर लड़ी थी लड़ाई आज़ादी की !!
मगर तू घर से निकले बिना ही लड़ कर जीत सकता है जंग यह ज़िंदगी की !!
न निकल घर से तू बेवजह , तेरे इस करम की मिलेगी सबको सजा !!
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