देख मंज़र अब  इस दुनिया का में कुछ इस  कदर हैरान हूँ!!

जो कभी खवाहिश हुआ करती थी और उसे पूरा इस कदर होते हुए देख के में थोड़ा सा परेशान हूँ !!
क्या ख्वाहिशें पूरी हुई हैं आज सबकी या फिर ज़िन्दगी ने करवट यह ऐसी पलटी है !!
गलियां सूनी हैं यहाँ परआजकल मगर मन्न  सबका कुछ भरा भरा सा है !!
हर कोई बैठा है घर में मगर जाने कैसा डर दिल में सबके आज ज़रा ज़रा सा है !!

देख मंज़र अब  इस दुनिया का में कुछ इस  कदर हैरान हूँ!!

कभी ज़दो-जेहत में ज़िन्दगी की सुबह से शाम हुआ करती थी यहाँ
बंदिशें की सलाखों में अक्सर मैंने बेजुबानो को सब कहते हुए सुना था !!
आज आज़ाद हैं पंछी सब इस  खुले आसमान में
और हालत तड़पते हुए इंसान की इस कदर देख कर में खुद बेजुबान हूँ !!

देख मंज़र अब  इस दुनिया का में कुछ इस  कदर हैरान हूँ!!

गलियां सब सूनी सूनी हैं यहाँ और क़ैद हर कोई यहाँ अब इंसान है !!
हर कोई सोच में बैठा है यह सोच कर के यहाँ के हाँ में आज परेशान हूँ !!
पंछियों की चेहचाहट उनकी ख़ामोशी की आवाज़ अब बन  गयी है !!
ज़िन्दगी पहले क्या हुआ करती थी और आज क्या बन गयी है !!

देख मंज़र अब  इस दुनिया का में कुछ इस  कदर हैरान हूँ!!



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