जब जब सैलाब दिल के अरमाओं का सैलाब भरता है
और पलकों का बाँध कमजोर पड़ने लगता है !!
तब तब हम भी एहसासों को अपने थोड़ी ढील देकर
अल्फ़ाज़ों में बहाकर उस उफान को थोड़ा -
कम कर देते हैं ख़ामोशी से कागज़ पर उतार कर !!
और पलकों का बाँध कमजोर पड़ने लगता है !!
तब तब हम भी एहसासों को अपने थोड़ी ढील देकर
अल्फ़ाज़ों में बहाकर उस उफान को थोड़ा -
कम कर देते हैं ख़ामोशी से कागज़ पर उतार कर !!
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