यह कैसी अनहोनी सी हो रही है इस दुनिया में !!
हर कोई क़ैद था यहाँ ज़िन्दगी की बंदिशों में!!
 तूफ़ान ऐसा आया एक पल में यहाँ !!
हर कोई क़ैदी बन कर रह गया मौत की इन लहरों  में !!

यह कैसी अनहोनी सी हो रही है इस दुनिया में !!
हर कोई था क़ैद था यहाँ ज़िन्दगी की बंदिशों में!!
आदमी बेजुबान सा खामोश है फुर्सत के इन लम्हों में !!
और पछियों की चेहचाहट सुनाई दे रही है इस खुले आसमान में !!


यह कैसी अनहोनी सी हो रही है इस दुनिया में !!
हर कोई क़ैद था यहाँ ज़िन्दगी की बंदिशों में!!
जो कहते थे मरने तक की भी फुर्सत नहीं है !!
वह आज मरने के डर से फुर्सत में बैठे हैं !!

यह कैसी अनहोनी सी हो रही है इस दुनिया में !!
हर कोई क़ैद था यहाँ ज़िन्दगी की बंदिशों में!!
हर कोई कहता था वक़्त नहीं है बाकी सब है यहाँ जीने के लिए !!
आज वक़्त है और बाकी चीजों की ज़दोजहत में लगे हैं 
सब ऐ-ज़िन्दगी तुझे जीने के लिए !!


यह कैसी अनहोनी सी हो रही है इस दुनिया में !!
हर कोई क़ैद था यहाँ ज़िन्दगी की बंदिशों में!!
खामोश  में भी हूँ बहुत आज यहाँ बैठा हुआ !!
बस ढूंढ रहा हूँ अलफ़ाज़ ऐ-ज़िन्दगी 
तुझे हाल-दिल अपना समझाने के लिए !!

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