कैसा ज़हर सा हवा में दुनिया की फ़ैल सा गया है !!
एक भारीपन सा भी सांस में मौत का साया सा लगने लगता है !!
बहम का सागर फिर इस कदर मन्न में  पनपने लगता है !!
भगवान् की चौखट भी इंसान से दूर सी हो गयी है अब तो !!
ज़िन्दगी सबको प्यारी लगने लगी है अब तो !!

कैसा ज़हर सा हवा में दुनिया की फ़ैल सा गया है !!
एक भारीपन सा भी सांस में मौत का साया सा लगने लगता है !!
हर कोई कमाने में लगा था यु तो अब तक इस शहर में अक्सर!!
अब खुद को दुनिया की भीड़ से बचाने में लगा है अब तो !!

कैसा ज़हर सा हवा में दुनिया की फ़ैल सा गया है !!
एक भारीपन सा भी सांस में मौत का साया सा लगने लगता है !!
कभी तो हर पल शोर था इस  शहर  की हवाओं में और इंसान खामोश सा था !!
आज शहर ये खामोश है और शोर सा हर किसी के मन्न में होने लगा है अब तो !!

कैसा ज़हर सा हवा में दुनिया की फ़ैल सा गया है !!
एक भारीपन सा भी सांस में मौत का साया सा लगने लगता है !!
भरी है आज उड़ान पंछियों ने भी  बेफिक्र होकर  इस खुले आसमान में !!
और इंसान अपने ही आशियाने में क़ैद सा होने लगा है अब तो !!


कैसा ज़हर सा हवा में दुनिया की फ़ैल सा गया है !!
एक भारीपन सा भी सांस में मौत का साया सा लगने लगता है !!




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