आवो हवा में शहर की यह कैसा ज़हर फ़ैल सा रहा है !!
हर कोई यहाँ खुद के ही घर में जैसी बंदी सा हो गया हो!!
यु तो चैहरे पे हर किसी के नक़ाब यहाँ रहता है दोस्तों !!
अब चेहरा फिर भी हर कोई यहाँ ढक के चल रहा है !!

आवो हवा में शहर की यह कैसा ज़हर फ़ैल सा रहा है !!
हर कोई यहाँ खुद के ही घर में जैसी बंदी सा हो गया हो!!

सड़कें खाली खाली सी यहाँ आजकल हो गयी हैं !!
और मैं सब का यहाँ भरा भरा सा है आजकल !!
खुद को कोई बचा रहा है तो किसी को परिवार की अपने परवाह है !!
ज़हर फैला सा है यहाँ हवा में भी इसका हर कोई यहाँ गवाह है !!

आवो हवा में शहर की यह कैसा ज़हर फ़ैल सा रहा है !!
हर कोई यहाँ खुद के ही घर में जैसी बंदी सा हो गया हो!!

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