चेहरा संबारने में लगा है हर कोई यहाँ !!
जो मैं को निखारते तो शायद बात ही कुछ और होती !!
ज़िन्दगी तो काट रहे हैं सब यहाँ रोज !!
जो हर पल में ज़िन्दगी जीते तो बात कुछ और होती !!!
जो मैं को निखारते तो शायद बात ही कुछ और होती !!
ज़िन्दगी तो काट रहे हैं सब यहाँ रोज !!
जो हर पल में ज़िन्दगी जीते तो बात कुछ और होती !!!
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