ॐ तत्पुरषाय  बिद्महे महादेवाय धीमहि  तन्नो: रुद्र प्रचोदयात्त  !!

कण कण में शिव है !! काल शिव है !! अकाल शिव है!!

शिव शिव शिव शिव !!!!
ॐ नमः शिवाय !!
गले में है जिसके साँपों की माला!!सब कहते हैं जिसको डमरू वाला !!
नंदी की जो सवारी करे  और पिए जो विष का प्याला !!
ऐसा है मेरे शिव भोला भाला  !!

कण कण में शिव है !! काल शिव है !! अकाल शिव है!!
ॐ नमः शिवाय !!

सुबह में मेरी शिव है और शाम में मरी शिव है !!
खोजोगे जो दिल से तो पाओगे के पुरे जहान में शिव है !!
फ़िक्र छोड़ कर दुनिया की तू ,शिव की मौज में मस्त होजा !!
सब बिगड़ी बनायेगे वोह पार तुझे लगाएंगे वोह !!

कण कण में शिव है !! काल शिव है !! अकाल शिव है!!
ॐ नमः शिवाय !!

मायूस तू न हो !! बस मेरे भोले की पनाह हो !!
राह तुझे दिखाएगा वोह !!संभलना तुझे सिखाएगा वोह !!
नाम तू उसका जप ले !! भक्ति में उसकी तप ले !!
भक्ति के भाव सागर में जीवन रस पिलाएगा वोह !!
जीना तुझे सिखाएगा वोह  !!

कण कण में शिव है !! काल शिव है !! अकाल शिव है!!
ॐ नमः शिवाय !!


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