ॐ नमः शिवाय !!
ॐ त्रयंबकम यजा महे सुंग़न्धिम पुष्टि बर्द्धनम
उर्बरकबिम बन्धनान ,मृतिर्योमुक्षीय मातृतात !!

मेरे भोले के चरणों में यह दो जहां हैं मेरे !!
धूल हूँ इनके चरणों की और मयह भगवान् हैं मेरे !!
जब से शरण में मैं तेरी आया हूँ !!
हर मुश्किल में भी में मुस्कुराया हूँ !!
हाथ मेरा जबसे तुमने है थामा !!
संभल गया में जब जब डगमगाया हूँ !!

शिव ही काल है !! शिव ही महाकाल है !!
शिव ही अंत है !! शिव अनंत है !!

परवाह में क्यों करू जब सर पे मेरे तेरा हाथ है !!
अकेला क्यों समझूँ में खुद को जब तू मेरे साथ है !!
दुनिया मेरी शिव है !! शिव ही मेरी दुनिया है !!
मस्त मलंग मेरा भोला है कैलाश में जिसका बास है !!
त्रिशूल हाथ में जिसके है वह मेरा भोला है !!
नंदी की जो सबारी करे वह मेरा भोला है !!

शिव ही काल है !! शिव ही महाकाल है !!
शिव ही अंत है !! शिव अनंत है !!

गंगा  सर से जिसके निकलती है !! नाम उसके मेरी हर सांस है !!
परवाह में क्यों करू जब सर पे मेरे तेरा हाथ है !!
कण कण में शिव है मेरे मन्न में शिव है !!
गले में जिसके सांपो की माला है!!
कहते सब जिसको डमरू वाला हैं !!

शिव ही काल है !! शिव ही महाकाल है !!
शिव ही अंत है !! शिव अनंत है !!







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