क़तल करने का उनका अंदाज़ ही कुछ ऐसा था के सांस तक रुक रही थी मगर मुँह से आह तक न निकली उस दीवाने की!!
रुख कुछ इस कदर बदला
रुख कुछ इस कदर बदला हिम्मत के बादलों का उमीदों के आसमान में !! के हवा का रुख बदल कर ज़िन्दगी ने ख़ुशी की बारिश ना होने दी !!!
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