न में हिन्दू हूँ और ना ही  मुसलमान हूँ  क्यूंकि पहले में एक इंसान हूँ !!
जल रहे हैं लोग बिक रहा है ज़मीर मेरे देश में और बंट  रहे हैं लोग मेरे देश में !!
खून तुम देख लो हिन्दू का मुसलमान का !!
कहेगा खुद के में हूँ खून हिंदुस्तान का !!
क्यों इस सियासी चक्रव्यूह में तुम नादान फंस रहे हो!! 
जला रहे हो अपना ही घर और उसपे तुम सब हंस रहे हो !!


न में हिन्दू हूँ और ना ही  मुसलमान हूँ  क्यूंकि पहले में एक इंसान हूँ !!
जल रहे हैं लोग बिक रहा है ज़मीर मेरे देश में और बंट  रहे हैं लोग मेरे देश में !!

अपने ही घर को यु तबाह करके कौन सा नया आशियाना तुम पाओगे !!
इंसान हो इंसान ही बन कर रहो के फासले सब बना कर तुम कौन सा नया हहिंदुस्तान बनाओगे !!
छली हुआ है सीना जब एक इंसान का और जब घर टूटा है किसी इंसान का !!
महसूस तुम उस दर्द को करो !!
यूं न तुम लहू बहाओ मेरे हिंदुस्तान का !! देश यह तेरा है मेरा है पर नहीं है किसी शैतान का !!

न में हिन्दू हूँ और ना ही  मुसलमान हूँ  क्यूंकि पहले में एक इंसान हूँ !!
जल रहे हैं लोग बिक रहा है ज़मीर मेरे देश में और बंट  रहे हैं लोग मेरे देश में !!

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