जाने अनजाने में आज कुछ बात हो गयी !!
उन बीते हुए लम्हों से अपनी फिर मुलाक़ात हो गयी !!
वह कहते रहे इसमें हमारी कोई खता नहीं !!
जब तुम्हारी ही किस्मत तुमसे दगाबाज़ हो गयी !!
कभी कह देते थे हाल-इ-दिल खुल कर सबसे यु ही हम !!
और आज ये आलम-इ-ज़िन्दगी है की अपनी ही ख़ामोशी अपनी आवाज़ हो गयी !!
उन बीते हुए लम्हों से अपनी फिर मुलाक़ात हो गयी !!
वह कहते रहे इसमें हमारी कोई खता नहीं !!
जब तुम्हारी ही किस्मत तुमसे दगाबाज़ हो गयी !!
कभी कह देते थे हाल-इ-दिल खुल कर सबसे यु ही हम !!
और आज ये आलम-इ-ज़िन्दगी है की अपनी ही ख़ामोशी अपनी आवाज़ हो गयी !!
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