आँखों में हमने अपनी एक खवाब संजोया था !! टूटा जो खवाब तो यह दिल भी बहुत रोया था !!
मुस्कराहट थी होंठों पे दुनिया के सामने मगर चुपके चुपके यह दिल भी बहुत रोया था !!
साथ थे उनके कुछ लम्हो के लिए तो मुस्कुरा लिए !!
आंख खुली तो हक़ीक़त नज़र आयी के में तो सोया था!!

आँखों में हमने अपनी एक खवाब संजोया था !! टूटा जो खवाब तो यह दिल भी बहुत रोया था !!

मेरा आइना भी पह्चानने से मुझको इंकार करने लगा अब तो 
के मेरा वजूद मुझसे कुछ इस कदर खोया था !!
मंज़िल की भी चाह न रही इस दिल को अब तो!!
टूटा कुछ उस रात सपना इस कदर जो अब तक आँखों में संजोया था!!

आँखों में हमने अपनी एक खवाब संजोया था !! टूटा जो खवाब तो यह दिल भी बहुत रोया था !!

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