धुआं धुआं है यह ज़िन्दगी और हर खवाब यहाँ जल गया !!
ख्वाहिशों की आग सुलगती रही पल पल और में यु ही उमीदों की राख साथ लेकर आगे निकल गया !!
कभी दिल रोया ख़ामोशी से तो कभी अरमानों का समुन्दर पलकों पे ठहर गया !!
वक़्त कभी रुका नहीं और में तो में था कभी थका नहीं बस यु ही आगे निकल गया !!
ख्वाहिशों की आग सुलगती रही पल पल और में यु ही उमीदों की राख साथ लेकर आगे निकल गया !!
कभी दिल रोया ख़ामोशी से तो कभी अरमानों का समुन्दर पलकों पे ठहर गया !!
वक़्त कभी रुका नहीं और में तो में था कभी थका नहीं बस यु ही आगे निकल गया !!
Comments
Post a Comment