आँखों में उनकी हमने ज़िन्दगी को देखा था !!
के हमने तो उन आँखों में  खुद को देखा था
जाने कहा गुम  हो गयी अब तो ज़िन्दगी यह अपनी !!
ज़िन्दगी तो हमारी वह अपनी आँखों में कैद कर के ले गए !!
खुद से जो पूछा हमने उनका  का पता और कहा के क्या थी इसमें अपनी खता !!
आइना भी जब कुछ न बोला  हमसे !! तब जाना के अब तो खुदा भी शायद हो गया है हमसे खफा!!
उन आँखों की तलाश में अब यह ज़िन्दगी गुज़र रही है और एक अंजना सा दर्द इस दिल में है!!
क्या अब भी कोई ख़ुशी  बाकी मेरी ज़िन्दगी में है ??
क्यों यह उम्मीद टूटती नहीं है!! क्या है यह उम्मीद जो साँसों से अब छूटती नहीं है !!

आँखों में उनकी हमने ज़िन्दगी को देखा था !!
के हमने तो उन आँखों में  खुद को देखा था

Comments

Popular posts from this blog