खामोश रहता हु अक्सर पर बेजुबान नहीं !!
समझता हु फिदरत तेरी ऐ ज़िन्दगी में भी !!
के तेरे इरादों से में भी अनजान नहीं !!
दोष तेरा नहीं हांथों की इन लकीरों का है शायद !!
के मेरी मज़िल तुझे जीना है मुस्कुरा कर !!
पर यह राह तेरी इतनी भी आसान नहीं !!

खामोश रहता हु अक्सर पर बेजुबान नहीं !!

तूने हर पल में अपना चेहरा है बदला अक्सर
और हम फिर भी हुए मज़िल से गुमराह नहीं !!
कोशिश तेरी आज भी इरादों को मेरे हारने की है शायद !!
पर हम भी समझ गए हैं तुझे!!
अब मुझसे यु पर्दा करना इतना भी आसान नहीं !!

खामोश रहता हु अक्सर पर बेजुबान नहीं !!



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