तेरे उस एहसास को अब तक सीने में बसाये रखा है मैंने !!
ज़िन्दगी के ग़म को सीने में दबाये रखा है मैंने !!
पाता हूँ खुदको अक्सर इस भीड़ में भी तनहा फिर भी इस महफ़िल में ज़ाम उठाये रखा है मैंने !!
हर रोज हल पल खुद को दोबारा ज़िंदा करता हु !!
अब यह कैसे बताऊ ऐ ज़िन्दगी तुझे जीने के लिए कितनी दफा मरता हु !!!
ज़िन्दगी के ग़म को सीने में दबाये रखा है मैंने !!
पाता हूँ खुदको अक्सर इस भीड़ में भी तनहा फिर भी इस महफ़िल में ज़ाम उठाये रखा है मैंने !!
हर रोज हल पल खुद को दोबारा ज़िंदा करता हु !!
अब यह कैसे बताऊ ऐ ज़िन्दगी तुझे जीने के लिए कितनी दफा मरता हु !!!
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