हम ग़म के मारे  चल पड़े हैं उस राह पर जहा मंज़िल का कोई भी ठिकाना नहीं!!
घूम रहे हैं हांथों में खाली पैमाना लेकर मगर यहाँ तो दूर-दूर तक कोई मैखाना नहीं!!

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