माना के नादान हूँ मगर तुझसे न अनजान हूँ !!
तेरे थोड़े  सवालों से कुछ  परेशान हूँ !!
कभी तूने शिकवे दिए और फिर थोड़े गिले किये !!
बस इसी  कशम-कश में लगा हु ऐ ज़िन्दगी !!
मत  परख तू मुझको इस हद तक ऐ ज़िन्दगी !!
में खुदा नहीं ,में भी एक इंसान हूँ !!!

माना के नादान हूँ मगर तुझसे न अनजान हूँ !!
तेरे थोड़े  सवालों से कुछ  परेशान हूँ !!

आजमाया तूने है हमको कदम-कदम पर इस तरह अक्सर !!
 के टूटे  हर उस खवाब की में एक शमशान हूँ !!!
तू चेहरा बदल  लेती है अपना हर बार उस मंजर पर !!
मत समझना के मैं इस सबसे अनजान हूँ !!!

माना के नादान हूँ मगर तुझसे न अनजान हूँ !!
तेरे थोड़े  सवालों से कुछ  परेशान हूँ !!


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